श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.3.28 
तेनास्या गर्भस्सप्तवर्षाणि जठर एव तस्थौ॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इसके प्रभाव से उसका गर्भ सात वर्ष तक गर्भ में ही रहा। 28.
 
Due to its influence her pregnancy remained in the womb for seven years. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)