श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.3.22 
स चाण्डालतामुपगतश्च॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह त्रिशंकु चाण्डाल बन गया था। 22.
 
That Trisanku had become a Chandala. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)