श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  4.24.98 
श्रौते स्मार्त्ते च धर्मे विप्लवमत्यन्तमुपगते क्षीणप्राये च कलावशेषजगत्स्रष्टुश्चराचरगुरोरादिमध्यान्तरहितस्य ब्रह्ममयस्यात्मरूपिणो भगवतो वासुदेवस्यांशश्शम्बलग्रामप्रधानब्राह्मणस्य विष्णुयशसो गृहेऽष्टगुणर्द्धिसमन्वित: कल्किरूपी जगत्यत्रावतीर्य सकलम्लेच्छदस्युदुष्टाचरणचेतसामशेषाणामपरिच्छिन्नशक्तिमाहात्म्य: क्षयं करिष्यति स्वधर्मेषु चाखिलमेव संस्थापयिष्यति॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्रौत और स्मार्तधर्म का घोर पतन हो जाने पर और कलियुग के लगभग बीत जाने पर, शम्भल (सम्भल) ग्राम के निवासी श्रेष्ठ विष्णुयशा ब्राह्मण के घर में, सम्पूर्ण जगत् के रचयिता, सर्वज्ञ गुरु, आदिमध्यान्तशून्य, ब्रह्ममय, आत्मारूप भगवान वासुदेव, आठ देवताओं सहित कल्कि रूप में जगत् में अवतार लेकर, समस्त म्लेच्छों, दस्युओं, दुष्टों और दुराचारी बुद्धिवालों का नाश करेंगे और समस्त लोगों को अपने-अपने धर्म में नियुक्त करेंगे॥98॥
 
In this way, after the extreme decline of Shrauta and Smartadharma and the almost passing of Kaliyuga, in the house of the best Vishnuyasha, the resident Brahmin of village Shambal (Sambhal), the creator of the entire world, the omniscient Guru, the Adimadhyantshunya, Brahmmay, soul-form Lord Vasudev, by incarnating in the world in the form of Kalki having the eight Gods, may all the Mlechchas, Dasyus, Will destroy the wicked and wicked minds and will appoint all the people to their respective religions. 98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)