श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  4.24.94 
एवं चातिलुब्धकराजासहाश्शैलानामन्तरद्रोणी: प्रजास्संश्रयिष्यन्ति॥ ९४॥ मधुशाकमूलफलपत्रपुष्पाद्याहाराश्च भविष्यन्ति॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार लोभी राजाओं द्वारा लगाए गए करों का भार सहन करने में असमर्थ होकर प्रजा पर्वत की गुफाओं में शरण लेगी और मधु, शाक, मूल, फल, पत्ते और फूल आदि खाकर अपना दिन व्यतीत करेगी ॥94-95॥
 
Thus, being unable to bear the burden of taxes imposed by greedy kings, the subjects will take refuge in mountain caves and spend their days eating honey, vegetables, roots, fruits, leaves and flowers etc. ॥94-95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)