श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  4.24.148 
कथाशरीरत्वमवाप यद्वै
मान्धातृनामा भुवि चक्रवर्ती।
श्रुत्वापि तत्को हि करोति साधु-
र्ममत्वमात्मन्यपि मन्दचेता:॥ १४८॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् के चक्रवर्ती सम्राट मान्धाता आज केवल कथाओं में ही जाने जाते हैं। ऐसा कौन मूर्ख होगा जो यह सुनकर अपने शरीर में भी स्नेह करेगा? [फिर पृथ्वी में प्रेम करने का क्या अर्थ है?]॥148॥
 
Mandhata, who was the Chakravarti emperor of the entire world, is today known only in stories. What idiot would hear this and feel affection for his own body too? [Then what is the point of having love for the earth?]॥ 148॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)