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vishnu 4.24.147: धिक्कार है रावण, अविक्षित और रामचन्द्र आदि के ऐश्वर्य को, जो सम्पूर्ण दिशाओं को देदीप्यमान करते हैं। अन्यथा काल के क्षणिक कटाक्ष से आज उनकी राख भी क्यों न बच सकी? 147॥   |   vishnu अध्याय 4.24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.24.147 
दशाननाविक्षितराघवाणा-
मैश्वर्यमुद्भासितदिङ्मुखानाम्।
भस्मापि शिष्टं न कथं क्षणेन
भ्रूभङ्गपातेन धिगन्तकस्य॥ १४७॥
 
 
अनुवाद
धिक्कार है रावण, अविक्षित और रामचन्द्र आदि के ऐश्वर्य को, जो सम्पूर्ण दिशाओं को देदीप्यमान करते हैं। अन्यथा काल के क्षणिक कटाक्ष से आज उनकी राख भी क्यों न बच सकी? 147॥
 
Shame on the [ephemeral] opulence of Ravana, Avikshit and Ramchandra etc. who make all the directions resplendent. Otherwise, why could not even its ashes be saved today due to the momentary sarcasm of time? 147॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)