श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  4.24.140 
धनधान्यर्द्धिमतुलां प्राप्नोत्यव्याहतेन्द्रिय:।
श्रुत्वैवमखिलं वंशं प्रशस्तं शशिसूर्ययो:॥ १४०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को वश में करके सूर्य और चन्द्रमा की इन स्तुतिमय वंशावलियों का सम्पूर्ण वर्णन सुनता है, वह अपार धन-सम्पत्ति प्राप्त करता है ॥140॥
 
A person who, having controlled his senses, listens to the complete description of these praiseworthy lineages of the Sun and the Moon, obtains immeasurable wealth and riches. ॥ 140॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)