श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  4.24.137 
श्रीपराशर उवाच
इत्येते धरणीगीताश्श्लोका मैत्रेय यैश्श्रुता:।
ममत्वं विलयं याति तपत्यर्के यथा हिमम्॥ १३७॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - हे मैत्रेय ! जो कोई पृथ्वी द्वारा कहे गए इन श्लोकों को सुनेगा, उसकी आसक्ति उसी प्रकार विलीन हो जाएगी, जैसे सूर्य के प्रकाश से बर्फ पिघल जाती है ॥137॥
 
Shri Parashar Ji said - O Maitreya! Whoever listens to these verses spoken by the Earth, his attachment will dissolve in the same way as the ice melts when the sun shines. ॥ 137॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)