श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  4.24.135 
दृष्ट्वा ममत्वादृतचित्तमेकं
विहाय मां मृत्युवशं व्रजन्तम्।
तस्यानु यस्तस्य कथं ममत्वं
हृद्यास्पदं मत्प्रभवं करोति॥ १३५॥
 
 
अनुवाद
मुझे आश्चर्य है कि जो राजा मुझसे इतना प्रेम करता था, उसे मुझे त्यागकर मृत्यु को प्राप्त होते देखकर भी उसका उत्तराधिकारी मेरे प्रति अपने हृदय में स्नेह कैसे बनाए रखता है ॥135॥
 
I wonder how a king who was so fond of me, seeing him abandon me and go to his death, still his successor continues to hold on to my affection in his heart. ॥135॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)