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vishnu 4.24.133: जिनके मन स्नेह से भरे हुए हैं, वे पिता, पुत्र और भाई मुझमें अत्यन्त आसक्त होने के कारण आपस में झगड़ते रहते हैं। 133.   |   vishnu अध्याय 4.24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.24.133 
मत्कृते पितृपुत्राणां भ्रातॄणां चापि विग्रह:।
जायतेऽत्यन्तमोहेन ममत्वादृतचेतसाम्॥ १३३॥
 
 
अनुवाद
जिनके मन स्नेह से भरे हुए हैं, वे पिता, पुत्र और भाई मुझमें अत्यन्त आसक्त होने के कारण आपस में झगड़ते रहते हैं। 133.
 
Those fathers, sons and brothers whose minds are full of affection, quarrel among themselves because of their extreme attachment to Me. 133.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)