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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार
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श्लोक 124
श्लोक
4.24.124
कथं ममेयमचला मत्पुत्रस्य कथं मही।
मद्वंशस्येति चिन्तार्त्ता जग्मुरन्तमिमे नृपा:॥ १२४॥
अनुवाद
‘यह पृथ्वी स्थायी रूप से मेरी, मेरे पुत्र की अथवा मेरे वंश की कैसे रहेगी?’ इस विचार से व्याकुल होकर ये सभी राजा मर गए ॥124॥
Troubled with the thought 'How will this earth permanently belong to me, my son or my descendants?' All these kings died. ॥124॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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