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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार
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श्लोक 109
श्लोक
4.24.109
यावत्स पादपद्माभ्यां पस्पर्शेमां वसुन्धराम्।
तावत्पृथ्वीपरिष्वङ्गे समर्थो नाभवत्कलि:॥ १०९॥
अनुवाद
जब तक भगवान् अपने चरणकमलों से इस पृथ्वी का स्पर्श करते रहे, तब तक कलियुग को पृथ्वी के सम्पर्क में आने का साहस नहीं हुआ ॥109॥
As long as God kept touching this earth with His lotus feet, Kaliyuga did not have the courage to come into contact with the earth. 109॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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