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vishnu 4.2.93: जैसे ही मैंने भीतरी कक्ष में प्रवेश किया, मैंने ही सबसे पहले उसे चुना; तुम क्यों मर रही हो?’ ‘मैंने उसे चुना है - मैंने उसे सबसे पहले चुना है’, ऐसा कहकर राजकुमारियों में उसके लिए बड़ा झगड़ा खड़ा हो गया।   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  4.2.93 
वृतो मयायं प्रथमं मयायं
गृहं विशन्नेव विहन्यसे किम्।
मया मयेति क्षितिपात्मजानां
तदर्थमत्यर्थकलिर्बभूव॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही मैंने भीतरी कक्ष में प्रवेश किया, मैंने ही सबसे पहले उसे चुना; तुम क्यों मर रही हो?’ ‘मैंने उसे चुना है - मैंने उसे सबसे पहले चुना है’, ऐसा कहकर राजकुमारियों में उसके लिए बड़ा झगड़ा खड़ा हो गया।
 
As soon as I entered the inner chambers, I was the first one to choose him; why are you dying?' By saying, 'I have chosen him - I have chosen him first', a great quarrel arose amongst the princesses for him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)