श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  4.2.65 
यावत्सूर्य उदेत्यस्तं यावच्च प्रतितिष्ठति।
सर्वं तद्यौवनाश्वस्य मान्धातु: क्षेत्रमुच्यते॥ ६५ ॥
 
 
अनुवाद
वह क्षेत्र जहाँ सूर्य उदय होता है और अस्त होता है, युवनाश्व के पुत्र मान्धातक का है।' 65.
 
The region where the Sun rises and sets belongs to Mandhataka, the son of Yuvanashwa.' 65.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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