vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 4: चतुर्थ अंश
»
अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र
»
श्लोक 53
श्लोक
4.2.53
तच्च कलशमपरिमेयमाहात्म्यमन्त्रपूतं पपौ॥ ५३॥
अनुवाद
और उन्होंने उस अनंत महिमावाले पात्र से मन्त्रयुक्त जल पी लिया ॥53॥
And he drank the mantra-filled water from that vessel of infinite glory. ॥ 53॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd