श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.2.34 
पृथुरनेनस:॥ ३४॥ पृथोर्विष्टराश्व:॥ ३५॥ तस्यापि चान्द्रो युवनाश्व:॥ ३६॥ चान्द्रस्य तस्य युवनाश्वस्य शावस्त: य: पुरीं शावस्तीं निवेशयामास॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अनेना का एक पुत्र था जिसका नाम पृथु था, पृथु का विस्तरश्व था, उसका चंद्रमा युवनाश्व था और उस चंद्रमा युवनाश्व का शवस्त नामक पुत्र था जिसने शवस्ति पुरी की स्थापना की। 34-37॥
 
Anena had a son named Prithu, Prithu had Vishtarashva, his moon Yuvanashva and that moon Yuvanashva had a son named Shavast who established Shavasti Puri. 34-37॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd