श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.2.29 
त्रैलोक्यनाथो योऽयं युष्माकमिन्द्र: शतक्रतुरस्य यद्यहं स्कन्धाधिरूढो युष्माकमरातिभिस्सह योत्स्ये तदहं भवतां सहाय: स्याम॥ २९॥
 
 
अनुवाद
"ये त्रैलोक्यनाथ शतक्रतु तुम्हारे इन्द्र हैं। यदि मैं इनके कंधों पर चढ़कर तुम्हारे शत्रुओं से युद्ध कर सकूँ, तो मैं तुम सबकी सहायता कर सकूँगा।" ॥29॥
 
"This Trilokyanaath Shatakratu is your Indra. If I can climb on his shoulders and fight with your enemies, then I can help you all." ॥29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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