श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.2.27 
एतच्च श्रुत्वा प्रणम्य भगवन्तं विष्णुममरा: पुरञ्जयसकाशमाजग्मुरूचुश्चैनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर देवताओं ने भगवान विष्णु को प्रणाम किया और पुरंजय के पास आकर उनसे कहा -॥27॥
 
On hearing this the gods bowed before Lord Vishnu and came to Puranjaya and said to him -॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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