श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  4.2.128 
समस्तभूतादमलादनन्ता-
त्सर्वेश्वरादन्यदनादिमध्यात्।
यस्मान्न किञ्चित्तमहं गुरूणां
परं गुरुं संश्रयमेमि विष्णुम्॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
मैं उन गुरुओं के भी परम गुरु भगवान विष्णु की शरण लेता हूँ जो सर्वव्यापी, सनातन, अनंत, सर्वशक्तिमान हैं और जिनका आदि, मध्य और शून्य से कोई भी अंश पृथक नहीं है ॥128॥
 
I take refuge in Lord Vishnu, the supreme Guru of all the Gurus, who is omnipresent, eternal, infinite, omnipotent and has nothing separate from the beginning, the middle and the void. 128॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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