श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  4.2.121 
दु:खं यदैवैकशरीरजन्म
शतार्द्धसंख्याकमिदं प्रसूतम्।
परिग्रहेण क्षितिपात्मजानां
सुतैरनेकैर्बहुलीकृतं तत्॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
एक शरीर धारण करना महान दुःख है, परन्तु इन राजकुमारियों को प्राप्त करके मैंने उसे पचास गुना बढ़ा दिया है और इतने पुत्र होने के कारण वह बहुत बढ़ गया है॥121॥
 
Taking only one body is a great sorrow, but I have multiplied it fifty times by acquiring these princesses. And because of having so many sons, it has increased a lot.॥ 121॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)