श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  4.2.118 
द्रक्ष्यामि तेषामिति चेत्प्रसूतिं
मनोरथो मे भविता ततोऽन्य:।
पूर्णेऽपि तत्राप्यपरस्य जन्म
निवार्यते केन मनोरथस्य॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं उसका जन्म देखूँ तो मेरे मन में दूसरी इच्छा उत्पन्न होगी और यदि वह भी पूरी हो जाए तो अन्य इच्छाओं के उत्पन्न होने से कौन रोक सकता है ॥118॥
 
If I see his birth, then another wish will arise in my mind and if that too is fulfilled then who can stop the emergence of other wishes? ॥118॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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