श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.2.11 
क्षुतवतश्च मनोरिक्ष्वाकु: पुत्रो जज्ञे घ्राणत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
छींक के समय मनु की घ्राणेन्द्रिय से इक्ष्वाकु नामक पुत्र उत्पन्न हुआ ॥11॥
 
At the time of sneezing, a son named Ikshvaku was born from Manu's sense of smell. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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