तयापि च सर्वमेतत्तत्प्रासादाद्युपभोगसुखं भृशमाख्यातं ममैवकेवलमतिप्रीत्यापार्श्वपरिवर्त्ती, नान्यासामस्मद्भगिनीनामित्येवमादि श्रुत्वा समस्तप्रासादेषु राजा प्रविवेश तनयां तनयां तथैवापृच्छत्॥ १०९॥
अनुवाद
उसने महल के सुख और सभी सुख-सुविधाओं का भी वर्णन किया और कहा कि 'अत्यंत प्रेम के कारण ऋषि केवल मेरे पास ही रहते हैं, किसी अन्य बहन के पास नहीं जाते।' यह सुनकर राजा पहले की तरह एक-एक करके प्रत्येक महल में गए और प्रत्येक कन्या से इसी प्रकार पूछा।
She also described the pleasures of the palace and all the comforts and said that due to extreme love, the sage stays only with me and does not go to any other sister. After listening to this as before, the king went to each palace one by one and asked each girl in the same manner.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥