श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 19: पुरुवंश  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  4.19.70 
मित्रायोश्च्यवनो नाम राजा॥ ७०॥ च्यवनात्सुदास: सुदासात्सौदास: सौदासात्सहदेवस्तस्यापि सोमक:॥ ७१॥ सोमकाज्जन्तु: पुत्रशतज्येष्ठोऽभवत्॥ ७२॥ तेषां यवीयान् पृषत: पृषताद् द्रुपदस्तस्माच्च धृष्टद्युम्नस्ततो धृष्टकेतु:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
मित्र के पुत्र च्यवन नामक राजा हुए, च्यवन के सुदास, सुदास के सौदास, सौदास के सहदेव, सहदेव के सोमक और सोमक के सौ पुत्र हुए जिनमें जंतु सबसे बड़ा और पृषत सबसे छोटा था। पृषता के पुत्र द्रुपद थे, द्रुपद के पुत्र धृष्टद्युम्न थे और धृष्टद्युम्न के पुत्र धृष्टकेतु थे। 70-73॥
 
Mitra's son became a king named Chyavan, Chyavan's Sudas, Sudas's Saudas, Saudasa's Sahadeva, Sahadeva's Somak and Somak had a hundred sons in which Jantu was the eldest and Prishat was the youngest. Prishata's son was Drupada, Drupada's son was Dhrishtadyumna and Dhrishtadyumna's son was Dhrishtaketu. 70-73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)