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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 19: पुरुवंश
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श्लोक 68
श्लोक
4.19.68
तत: कुमार: कृप: कन्या चाश्वत्थाम्नो जननी कृपी द्रोणाचार्यस्य पत्न्यभवत्॥ ६८॥
अनुवाद
तदनन्तर उस पुत्र का नाम कृप हुआ और अश्वत्थामा की माता जो द्रोणाचार्य की पत्नी थी, उसका नाम कृपी हुआ ॥68॥
Subsequently, the son's name became Kripa and the daughter Ashwatthama's mother, Dronacharya's wife, became Kripi. 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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