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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 19: पुरुवंश
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श्लोक 65
श्लोक
4.19.65
सत्यधृतेर्वराप्सरसमुर्वशीं दृष्ट्वा रेतस्कन्नं शरस्तम्बे पपात॥ ६५॥
अनुवाद
एक समय की बात है, अप्सराओं में श्रेष्ठ उर्वशी को देखकर सत्यधृत का वीर्य स्खलित होकर शरस्तंभ (ईख) पर गिर गया।
Once upon a time, upon seeing Urvashi, the best of the Apsaras, Satyadhritha's semen ejaculated and fell on the Sharastamba (reed).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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