श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 19: पुरुवंश  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  4.19.49 
तस्यापि धृतिमांस्तस्माच्च सत्यधृतिस्ततश्च दृढनेमिस्तस्माच्च सुपार्श्वस्ततस्सुमतिस्ततश्च सन्नतिमान्॥ ४९॥ सन्नतिमत: कृत: पुत्रोऽभूत्॥ ५०॥ यं हिरण्यनाभो योगमध्यापयामास॥ ५१॥ यश्चतुर्विंशतिं प्राच्यसामगानां संहिताश्चकार॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उनके पुत्र थे धृतिमान, धृतिमानक सत्यधृति, सत्यधृतिका धरहनेमि, धारहनेमिका सुपार्श्व, सुपार्श्वक सुमति, सुमातिका सन्नतिमान और सन्नतिमांका ऐसे पुत्र थे जिन्हें हिरण्यनाभ ने योगविद्या की शिक्षा दी थी और जिन्होंने पूर्वी सामग श्रुतियों की चौबीस संहिताओं की रचना की थी। 49-52॥
 
His son was Dhritiman, Dhritimanka Satyadhriti, Satyadhritika Dharhnemi, Dharhnemika Suparshva, Suparshvaka Sumati, Sumatika Sannatiman and Sannatimanka were the sons who were taught Yogavidya by Hiranyanabha and who composed twenty-four Samhitas of Eastern Samag Srutis. 49-52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)