श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 19: पुरुवंश  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  4.19.12-13 
माता भस्त्रा पितु: पुत्रो येन जात: स एव स:।
भरस्व पुत्रं दुष्यन्तमावमंस्थाश्शकुन्तलाम्॥ १२॥
रेतो धा: पुत्रो नयति नरदेव यमक्षयात्।
त्वं चास्य धाता गर्भस्य सत्यमाह शकुन्तला॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"माता तो चमड़े की धौंकनी के समान है, पुत्र पर पिता का ही अधिकार है, पुत्र उसी का स्वरूप है जिससे वह उत्पन्न हुआ है। हे दुष्यंत! तुम इस पुत्र का पालन-पोषण करो, शकुन्तला का अपमान मत करो। हे पुरुषों के स्वामी! अपने ही वीर्य से उत्पन्न पुत्र अपने पिता को [यमलोक से स्वर्ग] ले जाता है। 'तुमने ही इस पुत्र को जन्म दिया है'— शकुन्तला ने ठीक ही कहा है॥12-13॥
 
"The mother is only like a leather bellows, the father alone has the right over the son, the son is the manifestation of the one from whom he is born. O Dushyant! You nurture this son, do not insult Shakuntala. O Lord of men! The son born from his own semen takes his father [from Yamaloka to heaven]. 'You are the one who has given birth to this son'— Shakuntala has rightly said this.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)