श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 19: पुरुवंश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.19.1 
श्रीपराशर उवाच
पुरोर्जनमेजयस्तस्यापि प्रचिन्वान‍् प्रचिन्वत: प्रवीर: प्रवीरान्मनस्युर्मनस्योश्चाभयदस्तस्यापि सुद्युस्सुद्योर्बहुगतस्तस्यापि संयातिस्संयातेरहंयातिस्ततो रौद्राश्व:॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पाराशरजी ने कहा- पुरुक का पुत्र जनमेजय था। जन्मेजय का पुत्र प्राचीनवान्, प्राचीन्वान का प्रवीर, प्रवीर का मनस्यु, मनस्युक अभयद, अभयद का सुद्यु, सुद्युक बहुगत, बहुगत का संयति, संयातिका अहन्याति और अहन्यातिका का पुत्र रौद्रश्व था। 1॥
 
Shri Parasharji said – Puruka's son was Janamejaya. Janmejaya's son was Prachinvan, Prachinvan's Praveer, Praveer's Manasyu, Manasyuka Abhayad, Abhayad's Sudyu, Sudyuka Bahugata, Bahugata's Sanyati, Sanyatika Ahanyati and Ahanyatika's son was Raudrashwa. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)