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vishnu 4.15.7: रजोगुण के उदय से प्रेरित होकर उसका मन उस विपरीत भावना के अनुसार दृढ़ हो गया। अतः उसमें दिव्य भावना का अभाव होने से और भगवान द्वारा मारे जाने पर रावण जन्म लेने पर उसने सम्पूर्ण त्रिलोकी में सबसे अधिक सुख और सम्पत्ति प्राप्त की।   |   vishnu अध्याय 4.15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.15.7 
रज उद्रेकप्रेरितैकाग्रमतिस्तद्भावनायोगात्ततोऽवाप्तवधहैतुकीं निरतिशयामेवाखिलत्रैलोक्याधिक्यधारिणीं दशाननत्वे भोगसम्पदमवाप॥ ७॥
 
 
अनुवाद
रजोगुण के उदय से प्रेरित होकर उसका मन उस विपरीत भावना के अनुसार दृढ़ हो गया। अतः उसमें दिव्य भावना का अभाव होने से और भगवान द्वारा मारे जाने पर रावण जन्म लेने पर उसने सम्पूर्ण त्रिलोकी में सबसे अधिक सुख और सम्पत्ति प्राप्त की।
 
Inspired by the rise of Rajoguna, his mind became firm [according to that opposite feeling]. Therefore, due to the lack of divine feeling in him, and being killed by God, when Ravan was born, he obtained the most pleasures and wealth in the entire Triloki. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)