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vishnu 4.15.5: उस समय हिरण्यकशिपु को यह आभास ही नहीं हुआ कि वह भगवान विष्णु हैं ॥5॥   |   vishnu अध्याय 4.15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.15.5 
तत्र च हिरण्यकशिपोर्विष्णुरयमित्येतन्न मनस्यभूत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय हिरण्यकशिपु को यह आभास ही नहीं हुआ कि वह भगवान विष्णु हैं ॥5॥
 
At that time, Hiranyakashipu did not have the feeling that he was Lord Vishnu. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)