Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 4.15.45-46: जो गृहाचार्य यादवपुत्रों को धनुर्विद्या सिखाने के लिए सदैव तत्पर रहते थे, उनकी संख्या तीन करोड़ अट्ठासी लाख थी। फिर उन श्रेष्ठ यादवों की गणना कौन कर सकता है? जहाँ यदुराज उग्रसेन सदैव हजारों और लाखों की संख्या में रहते थे ॥ 45-46॥ | vishnu अध्याय 4.15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन । vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो गृहाचार्य यादवपुत्रों को धनुर्विद्या सिखाने के लिए सदैव तत्पर रहते थे, उनकी संख्या तीन करोड़ अट्ठासी लाख थी। फिर उन श्रेष्ठ यादवों की गणना कौन कर सकता है? जहाँ यदुराज उग्रसेन सदैव हजारों और लाखों की संख्या में रहते थे ॥ 45-46॥
The number of those Grihacharyas who were always ready to teach archery to the sons of Yadavas was three crores eighty eight lakhs. Then who can count those great Yadavas? Where Yaduraj Ugrasen always lived in thousands and lakhs. ॥ 45-46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥