श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.15.3 
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं सर्वधर्मभृतां वर।
कौतूहलपरेणैतत्पृष्टो मे वक्तुमर्हसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ मुनि! यह सुनने की मेरी बड़ी इच्छा है। मैंने बड़ी जिज्ञासावश आपसे यह प्रश्न पूछा है; कृपया इसका स्पष्टीकरण करें।॥3॥
 
O great sage among all the virtuous souls! I have a great desire to hear this. I have asked you this question out of great curiosity; please explain it. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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