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vishnu 4.15.17: हे! वह भगवान द्वेष से भी जपने और स्मरण करने से समस्त देवताओं और दानवों को दुर्लभ परम फल प्रदान करते हैं, फिर सम्यक् भक्ति वाले मनुष्यों के विषय में तो कहना ही क्या है? 17॥   |   vishnu अध्याय 4.15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.15.17 
अयं हि भगवान‍् कीर्तितश्च संस्मृतश्च द्वेषानुबन्धेनापि अखिलसुरासुरादिदुर्लभं फलं प्रयच्छति किमुत सम्यग्भक्तिमतामिति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे! वह भगवान द्वेष से भी जपने और स्मरण करने से समस्त देवताओं और दानवों को दुर्लभ परम फल प्रदान करते हैं, फिर सम्यक् भक्ति वाले मनुष्यों के विषय में तो कहना ही क्या है? 17॥
 
Hey! That God gives rare ultimate results to all the gods and demons by chanting and remembering even due to hatred, then what can we say about the people with proper devotion? 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)