Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 4.15.13: जिनके नेत्र खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान हैं, जो चमकीले पीले वस्त्र, शुद्ध मुकुट, चूड़ियाँ, हार और तलवार से सुशोभित हैं, जिनकी चार लंबी भुजाएँ हैं और जो शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं, वे भगवान् का वह दिव्य रूप अत्यंत आत्मीयता के कारण यात्रा, भोजन, स्नान, बैठने और सोने आदि समस्त कार्यों में उनके मन से कभी दूर नहीं हुआ॥ 13॥ | vishnu अध्याय 4.15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन । vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिनके नेत्र खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान हैं, जो चमकीले पीले वस्त्र, शुद्ध मुकुट, चूड़ियाँ, हार और तलवार से सुशोभित हैं, जिनकी चार लंबी भुजाएँ हैं और जो शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं, वे भगवान् का वह दिव्य रूप अत्यंत आत्मीयता के कारण यात्रा, भोजन, स्नान, बैठने और सोने आदि समस्त कार्यों में उनके मन से कभी दूर नहीं हुआ॥ 13॥
That divine form of the Lord whose eyes are like the petals of a blooming lotus, who is adorned with bright yellow coloured clothes, a pure crown, bangles, necklace and sword, who has four long arms and who holds a conch, discus, mace and lotus, due to extreme intimacy, never went away from his mind during all activities like travelling, eating, bathing, sitting or sleeping.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥