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vishnu 4.15.12: उसका हृदय अनेक जन्मों की घृणा से भरा हुआ था, इसलिए उनकी निन्दा और तिरस्कार करते हुए वह निरन्तर भगवान् के नामों का उच्चारण करता रहा, जो उनकी समयानुकूल लीला से उत्पन्न होते हैं ॥12॥   |   vishnu अध्याय 4.15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.15.12 
ततश्च तत्कालकृतानां तेषामशेषाणामेवाच्युतनाम्नामनवरतमनेकजन्मसु वर्द्धितविद्वेषानुबन्धिचित्तो विनिन्दनसन्तर्जनादिषूच्चारणमकरोत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उसका हृदय अनेक जन्मों की घृणा से भरा हुआ था, इसलिए उनकी निन्दा और तिरस्कार करते हुए वह निरन्तर भगवान् के नामों का उच्चारण करता रहा, जो उनकी समयानुकूल लीला से उत्पन्न होते हैं ॥12॥
 
His heart was filled with the hatred of many births, so while criticizing and despising them, he constantly uttered the names of the Lord, which are created by His timely play. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)