श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 14: अनमित्र और अन्धकके वंशका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  4.14.49 
बहुकालोपभुक्तभगवत्सकाशावाप्तशरीरपातोद्भवपुण्यफलो भगवता राघवरूपिणा सोऽपि निधनमुपपादित:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
स्वयं भगवान् के हाथ से मारे जाने के पुण्य से प्राप्त विविध सुखों को दीर्घकाल तक भोगने के पश्चात् अन्त में राघवरूप में भगवान् के द्वारा वह मारा गया ॥49॥
 
After enjoying for a long time the various pleasures received by the virtue of being killed by the hand of God himself, he was ultimately killed by God in the form of Raghavar. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)