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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
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श्लोक 98
श्लोक
4.13.98
कृष्णोऽपि द्विक्रोशमात्रं भूमिभागमनुसृत्य दूरस्थितस्यैव चक्रं क्षिप्त्वा शतधनुषश्शिर-श्चिच्छेद॥ ९८॥
अनुवाद
श्रीकृष्णचन्द्र ने केवल दो कोस तक उसका पीछा किया और शतधन्वा का सिर काट डाला, यद्यपि उसका चक्र दूर था॥ 98॥
Sri Krishna Chandra chased him for only two kos and beheaded Shatadhanva even though his discus was far away.॥ 98॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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