श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  4.13.83 
नाहं बलदेववासुदेवाभ्यां सह विरोधायालमित्युक्तश्चाक्रूरमचोदयत्॥ ८३॥ असावप्याह॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
मैं बलदेव और वसुदेव का विरोध करने में समर्थ नहीं हूँ ।’ उनके ऐसा कहने पर शतधन्वा ने अक्रूर से सहायता माँगी, तब अक्रूर ने भी कहा -॥ 83-84॥
 
I am not capable of opposing Baladev and Vasudeva.' On his saying so, Shatdhanva asked for help from Akrura, then Akrura also said -॥ 83-84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)