vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 4: चतुर्थ अंश
»
अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
»
श्लोक 83
श्लोक
4.13.83
नाहं बलदेववासुदेवाभ्यां सह विरोधायालमित्युक्तश्चाक्रूरमचोदयत्॥ ८३॥ असावप्याह॥ ८४॥
अनुवाद
मैं बलदेव और वसुदेव का विरोध करने में समर्थ नहीं हूँ ।’ उनके ऐसा कहने पर शतधन्वा ने अक्रूर से सहायता माँगी, तब अक्रूर ने भी कहा -॥ 83-84॥
I am not capable of opposing Baladev and Vasudeva.' On his saying so, Shatdhanva asked for help from Akrura, then Akrura also said -॥ 83-84॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×