श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  4.13.80 
तदुत्तिष्ठारुह्यतां रथ: शतधन्वनिधनायोद्यमं कुर्वित्यभिहितस्तथेति समन्वीप्सितवान‍्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
अतः उठो, रथ पर सवार हो जाओ और शतधन्वा को मारने का प्रयत्न करो।’ जब कृष्णचन्द्र ने ऐसा कहा, तब बलदेव ने भी ‘बहुत अच्छा’ कहकर इसे स्वीकार कर लिया।
 
Therefore get up, mount your chariot and try to kill Shatadhanva.' When Krishnachandra said this, Baladev too accepted it saying, 'Very good.' 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)