अनिष्क्रमणे च मधुरिपुरसाववश्यमत्र बिलेऽत्यन्तं नाशमवाप्तो भविष्यत्यन्यथा तस्य जीवत: कथमेतावन्त दिनानि शत्रुजये व्याक्षेपो भविष्यतीति कृताध्यवसाया द्वारकामागम्य हत: कृष्ण इति कथयामासु:॥ ४८॥
अनुवाद
परंतु जब बहुत दिनों तक वह उसमें से बाहर न आया, तब उसने सोचा कि ‘श्री मधुसूदन अवश्य ही इसी गुफा में मारे गए होंगे, अन्यथा यदि वे जीवित होते, तो शत्रु को परास्त करने में उन्हें इतने दिन क्यों लगते?’ ऐसा निश्चय करके वह द्वारका आया और वहाँ घोषणा की कि श्रीकृष्ण मारे गए हैं॥48॥
But when he did not come out of it for many days, he thought that 'Sri Madhusudan must have been killed in this cave, otherwise why would it take him so many days to defeat the enemy if he were alive?' Having made this decision, he came to Dwarka and announced there that Sri Krishna has been killed. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥