श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  4.13.44 
तं च स्यमन्तकाभिलषितचक्षुषमपूर्वपुरुषमागतं समवेक्ष्य धात्री त्राहि त्राहीति व्याजहार॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
स्यमन्तकमणिकी ओर लालसाभरी दृष्टिसे देखकर एक विचित्र पुरुषको वहाँ आते देखकर वह धाय 'त्राहि-त्राहि' चिल्लाने लगी ॥44॥
 
Looking towards Syamantakamani with longing eyes, seeing a strange man coming there, the nurse started screaming 'trahi-trahi'. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)