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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
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श्लोक 41
श्लोक
4.13.41
अन्त:प्रविष्टश्च धात्र्या: सुकुमारकमुल्लालयन्त्या वाणीं शुश्राव॥ ४१॥
अनुवाद
भीतर जाकर प्रभु ने सुकुमार (बालक) को सान्त्वना देनेवाली धाय के वचन सुने॥41॥
Going inside the Lord heard the words of the nurse consoling Sukumar (child). ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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