श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.13.29 
सत्राजिदप्यच्युतोमामेतद्याचयिष्यतीत्यवगम्य रत्नलोभाद‍्भ्रात्रे प्रसेनाय तद्रत्नमदात्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जब सत्राजित को पता चला कि भगवान उससे यह मणि मांगने वाले हैं तो उसने लालच के कारण उसे अपने भाई प्रसेन को दे दिया।
 
When Satrajit came to know that the Lord was going to ask for this gem from him, out of greed he gave it to his brother Prasena.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)