श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.13.20 
द्वारकावासी जनस्तु तमायान्तमवेक्ष्य भगवन्तमादिपुरुषं पुरुषोत्तममवनिभारावतरणायांशेन मानुषरूपधारिणं प्रणिपत्याह॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उनको आते देख द्वारकावासियों ने पृथ्वी का भार हरण करने के लिए मनुष्य रूप में अवतरित हुए आदिपुरुष भगवान पुरुषोत्तम को प्रणाम किया और कहा - ॥20॥
 
Seeing him coming, the people of Dwarka paid obeisance to Lord Purushottam, the primal man in human form, who had incarnated in human form in order to take away the burden of the earth, and said - ॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)