श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  4.13.162 
इत्येतद्भगवतो मिथ्याभिशस्तिक्षालनं य: स्मरति न तस्य कदाचिदल्पापि मिथ्याभिशस्तिर्भवति अव्याहताखिलेन्द्रियश्चाखिलपापमोक्षमवाप्नोति॥ १६२॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भगवान् द्वारा मिथ्या आरोपों से शुद्धि के इस प्रसंग का स्मरण करेगा, उस पर कभी भी किंचित मात्र भी मिथ्या आरोप नहीं लगेगा। उसकी समस्त इन्द्रियाँ बलवान रहेंगी और वह समस्त पापों से मुक्त हो जाएगा ॥162॥
 
Whoever remembers this event of the Lord's purification of false accusations will never be affected by even the slightest false accusation. All his senses will remain strong and he will be freed from all sins. ॥162॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे त्रयोदशोऽध्याय:॥ १३॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)