श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  4.13.158 
तदलं यदुलोकोऽयं बलभद्र: अहं च सत्या च त्वां दानपते प्रार्थयाम:॥ १५८॥ तद्भवानेव धारयितुं समर्थ:॥ १५९॥
 
 
अनुवाद
अतः हे दाता! यादवगण, बलभद्र, मैं और सत्यभामा सभी मिलकर आपसे प्रार्थना करते हैं कि केवल आप ही इसे धारण करने में समर्थ हैं।।158-159।।
 
Therefore, O donor, the Yadavas, Balabhadra, I and Satyabhama all together pray to you that only you are capable of wearing it. 158-159.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)