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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
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श्लोक 152
श्लोक
4.13.152
बलसत्यावलोकनात्कृष्णोऽप्यात्मानं गोचक्रान्तरावस्थितमिव मेने॥ १५२॥
अनुवाद
बलभद्र और सत्यभामा को देखकर कृष्णचन्द्र ने अपने को दोनों ओर से संकट में पड़ा हुआ देखा, मानो कोई प्राणी बैल और पहिये के बीच में पड़ा हो ॥152॥
Seeing Balbhadra and Satyabhama, Krishnachandra saw himself in distress from both the sides, like a creature lying between a bull and a wheel. 152॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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