श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 145
 
 
श्लोक  4.13.145 
तत: स्वोदरवस्त्रनिगोपितमतिलघुकनकसमुद‍्गकगतं प्रकटीकृतवान‍्॥ १४५॥ ततश्च निष्क्राम्य स्यमन्तकमणिं तस्मिन्यदुकुलसमाजे मुमोच॥ १४६॥
 
 
अनुवाद
तब अक्रूर जी ने अपने कमरवस्त्र में एक छोटी सी सोने की पेटी में छिपी हुई स्यमन्तक मणि को प्रकट किया और उसे पेटी से निकालकर यादव समुदाय में रख दिया।।145-146।।
 
Then Akrura ji revealed the Syamantaka Mani which was hidden in a small gold box in his waist cloth and took it out from the box and placed it in the Yadava community. 145-146.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)