श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  4.13.144 
तदिदं स्यमन्तकरत्नं गृह्यतामिच्छया यस्याभिमतं तस्य समर्प्यताम्॥ १४४॥
 
 
अनुवाद
अब यह आपकी स्यमन्तकमणि है, जिसे चाहें दे दीजिए ॥144॥
 
Now, here is your Syamantakamani. Give it to whomever you wish.''॥ 144॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)